"मैं एक लड़की हूँ... सपना देखना आज भी मेरे लिए जुर्म है"
मैं वो लड़की हूँ जिसे बचपन से कहा गया —
"धूप में मत निकलो, रंग काला हो जाएगा…"
"ज्यादा मत बोलो, लड़कियाँ चुप ही अच्छी लगती हैं…"
"घर संभालो, बाहर की दुनिया लड़कों के लिए है…"
लेकिन दिल में एक सपना था —
कुछ बनने का, उड़ने का, अपने नाम से पहचान बनाने का।
जब कहा — "पढ़ना चाहती हूँ…"
तो जवाब मिला —
"इतना पढ़कर क्या करेगी? शादी तो करनी है!"
जब बोला — "जॉब करना चाहती हूँ…"
तो कहा गया —
"बहू हो, घर संभालो। बाहर की दुनिया तुम्हारे लिए नहीं है।"
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## 💔 **सच तो ये है:**
लड़की होना आज भी एक इम्तिहान है,
हर दिन — घर में, समाज में, रिश्तों में…
उसे ये साबित करना होता है कि
**सपने देखने का हक़ उसे भी है।**
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## 🧠 **सोचने वाली बात:**
एक लड़की को आज भी
अपने कपड़ों से, आवाज़ से, सपनों से
नापा जाता है।
**पर क्या कोई पूछता है —
उसकी खुशी क्या है?**
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## 🙏 **एक उम्मीद:**
अगर आप एक लड़की को जानते हैं —
जो अपने लिए कुछ करना चाहती है,
तो उसे रोको मत।
उसके रास्ते मत काटो।
क्योंकि एक लड़की जो सपने देखती है,
वो सिर्फ अपने लिए नहीं —
पूरे समाज के लिए मिसाल बनती है।
## ✨ **क्योंकि…**
**"मैं एक लड़की हूँ, और मुझे उड़ने का हक़ है —
आसमा
न तुम्हारा हो सकता है,
पर उड़ान मेरी भी होगी…"**

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