"घर वाले सपोर्ट नहीं करते, बस उम्मीदें रखते हैं"
घर के लोग कहते हैं —
"कुछ बड़ा कर दिखाओ..."
"नाम रौशन करो..."
"कमाने लगो, जिम्मेदारी निभाओ..."
लेकिन जब आप बोलते हैं —
"मुझे थोड़ा वक्त दो"
"थोड़ी हिम्मत चाहिए"
"थोड़ा समझना होगा..."
तो जवाब मिलता है —
"हर बात का बहाना मत बना"
"हमने तुम्हें पढ़ाया है, अब हमारी बारी है"
"पड़ोसी का बेटा देखो, कहाँ पहुंच गया"
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## 💔 **सच तो ये है:**
घर वाले सपनों का बोझ तो दे देते हैं,
पर उस बोझ को उठाने के लिए कंधा नहीं देते।
जब आप गिरते हैं,
तो कोई नहीं पकड़ता…
बस ये कहा जाता है —
"तुमसे तो कुछ होता ही नहीं!"
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## 🧠 **समझने की बात:**
हर बेटा-बेटी फेल नहीं होते,
कई बार वो सिर्फ **समझ की कमी** से हार जाते हैं।
हर कोई कामयाब होना चाहता है —
पर उसे चाहिए होता है **घर से थोड़ा भरोसा**,
थोड़ा विश्वास, और बस दो शब्द —
**"हम तुम्हारे साथ हैं"**
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## 🙏 **एक गुज़ारिश:**
अगर आपके घर में कोई सपना देख रहा है,
तो उस पर ताने मत दीजिए,
उसका मज़ाक मत उड़ाइए…
बस उसका साथ दीजिए।
क्योंकि दुनिया से लड़ना आसान है —
अगर **घर साथ हो**।

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